भारत में शिक्षा का भविष्य 2025 में गंभीर सवालों के घेरे में है।
बढ़ती स्कूल फीस, संसाधनों की कमी, डिजिटल शिक्षा का अभाव, सरकारी स्कूलों की कमजोर स्थिति और निजी स्कूलों की महंगी शिक्षा—इन सभी कारणों से देश में एक बड़ा शिक्षा संकट पैदा हो गया है।
“जनतंत्र प्रहरी” ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है।
Table of Contents
1. शिक्षा संकट 2025 की मौजूदा स्थिति
2. स्कूल फीस में जबरदस्त बढ़ोतरी
3. सरकारी स्कूलों की स्थिति
4. निजी स्कूलों की मनमानी
5. डिजिटल शिक्षा और इंटरनेट का अभाव
6. ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा संकट
7. शहरों में शिक्षा का बढ़ता खर्च
8. विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता में गिरावट
9. जनतंत्र प्रहरी का शिक्षा सर्वे
10. माता-पिता की समस्याएँ
11. शिक्षकों की चुनौतियाँ
12. शिक्षा सुधार की जरूरत
13. विशेषज्ञों की राय
14. निष्कर्ष

1. शिक्षा संकट 2025 की मौजूदा स्थिति
भारत में शिक्षा 2025 में दो भागों में बँट गई है:
– अमीर बच्चों की डिजिटल, मॉडर्न शिक्षा
– गरीब और मध्यम वर्ग की संघर्ष करती शिक्षा
रिपोर्ट के अनुसार:
– शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ रहा है
– गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सीमित हो रही है
– सरकारी स्कूलों में सुधार की रफ्तार धीमी है
2. स्कूल फीस में जबरदस्त बढ़ोतरी
निजी स्कूलों ने 2025 में फीस 10% से 25% तक बढ़ाई है।
बढ़े हुए खर्च:
– एडमिशन फीस
– ट्यूशन फीस
– डेवलपमेंट फीस
– बस फीस
– किताबें और यूनिफॉर्म
मध्यम वर्ग के अभिभावकों का बजट बिगड़ गया है।
3. सरकारी स्कूलों की स्थिति—सुविधाएँ अब भी कमजोर
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सरकारी स्कूल कई समस्याओं से जूझ रहे हैं।
समस्याएँ:
– शिक्षकों की कमी
– खराब बिल्डिंग
– लैब और लाइब्रेरी नहीं
– पीने के पानी और शौचालय की कमी
– बिजली का अभाव
– डिजिटल संसाधनों की कमी
सरकारी सिस्टम डिजिटल इंडिया की बात करता है,
लेकिन स्कूलों में अभी भी कंप्यूटर नहीं हैं।
4. निजी स्कूलों की मनमानी
निजी स्कूल फीस बढ़ाने में किसी नियम का पालन नहीं करते।
शिकायतें:
– अचानक फीस बढ़ोतरी
– जबरन किताबें–कॉपी और यूनिफॉर्म खरीदना
– स्कूल बस के महंगे चार्ज
– एडमिशन के नाम पर पैसा
माता-पिता मजबूर होकर महंगी शिक्षा लेते हैं।
5. डिजिटल शिक्षा और इंटरनेट का अभाव
COVID के बाद डिजिटल शिक्षा जरूरी हुई,
लेकिन भारत में:
– 40% बच्चों के पास स्मार्टफोन नहीं
– 35% के पास इंटरनेट नहीं
– 45% बच्चों के पास लैपटॉप नहीं
डिजिटल गैप बढ़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र सबसे पीछे है।
6. ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा संकट
ग्रामीण भारत में शिक्षा के सबसे बड़े संकट:
– स्कूल दूर
– कोई परिवहन सुविधा नहीं
– शिक्षकों की कमी
– संसाधनों की कमी
– लड़कियों की शिक्षा में बाधाएँ
गाँवों में बहुत से बच्चे 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं।
7. शहरों में शिक्षा का बढ़ता खर्च
शहरों में शिक्षा एक “लाइफस्टाइल” बन चुकी है।
खर्च:
– ₹3000 से ₹15,000 मासिक फीस
– ₹5000–₹20,000 बस फीस
– नए कोर्स और ट्यूशन
– डिजिटल फीस और प्रोजेक्ट फीस
अभिभावक कहते हैं कि “शिक्षा शानदार नहीं, बल्कि महंगी हो गई है।”
8. विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता में गिरावट
ASER रिपोर्ट के अनुसार:
– 3 में से 1 बच्चा अपनी कक्षा का पाठ नहीं पढ़ पाता
– गणित में स्थिति और खराब
– डिजिटल distractions ने ध्यान कमजोर किया
शिक्षा की गुणवत्ता केवल इमारतों से नहीं, बल्कि सीखने के स्तर से तय होती है।
9. जनतंत्र प्रहरी का शिक्षा सर्वे
हमने 7 राज्यों में 1500 लोगों से बात की।
प्रमुख परिणाम:
– 64% अभिभावक: फीस बहुत बढ़ गई
– 48% छात्र: डिजिटल संसाधनों की कमी
– 55% शिक्षक: बच्चों का ध्यान कम
– 39% छात्र: आर्थिक समस्या से पढ़ाई छूटी
– 70% अभिभावक: निजी स्कूल मनमानी कर रहे
10. माता-पिता की समस्याएँ
अभिभावकों ने बताया:
– EMI या कर्ज लेकर फीस देना
– बढ़ती बस फीस
– ट्यूशन का खर्च
– बच्चों के मोबाइल/लैपटॉप का खर्च
वे चाहते हैं कि शिक्षा को सस्ता और सुलभ बनाया जाए।
11. शिक्षकों की चुनौतियाँ
– कम वेतन
– काम का अधिक बोझ
– ट्रेनिंग की कमी
– बड़े-बड़े क्लासरूम
– डिजिटल टूल्स की कमी
शिक्षक कहते हैं कि बिना संसाधनों के गुणवत्ता सुधारना मुश्किल है।
12. शिक्षा सुधार की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार सुधार:
– सरकारी स्कूलों में डिजिटल सुविधा
– निजी स्कूलों पर नियंत्रण
– फीस रेगुलेशन
– ग्रामीण शिक्षा मजबूत
– तकनीकी कोर्स बढ़ाना
– बच्चों पर आर्थिक बोझ कम करना
13. विशेषज्ञों की राय
भारत को:
– डिजिटल शिक्षा
– सस्ती शिक्षा
– व्यावसायिक शिक्षा
– व्यवहारिक स्किल
– तकनीक आधारित शिक्षा
की आवश्यकता है।
14. निष्कर्ष
भारत में शिक्षा संकट 2025 केवल फीस बढ़ने का संकट नहीं है।
यह संघर्ष है:
– बच्चों के भविष्य का
– अभिभावकों के बजट का
– शिक्षा की गुणवत्ता का
– डिजिटल गैप का
यदि सरकार, स्कूल और समाज मिलकर काम करें,
तो भारत का शिक्षा भविष्य सुरक्षित हो सकता है।
शिक्षा केवल किताबें नहीं—एक बेहतर जिंदगी का रास्ता है।
