भारत में महिला सुरक्षा 2025 का मुद्दा पहले से ज्यादा गंभीर हो चुका है।
महिलाओं के खिलाफ अपराध, छेड़छाड़, घरेलू हिंसा, साइबर क्राइम और उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
“जनतंत्र प्रहरी” की टीम ने देश के कई राज्यों में जाकर महिलाओं, पुलिस अधिकारियों, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से बात की और यह विस्तृत रिपोर्ट तैयार की।
Table of Contents
1. महिला सुरक्षा 2025 की वास्तविक स्थिति
2. महिलाओं के खिलाफ अपराध क्यों बढ़ रहे हैं
3. घरेलू हिंसा के बढ़ते मामले
4. कार्यस्थल पर उत्पीड़न
5. सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़
6. साइबर क्राइम और ऑनलाइन उत्पीड़न
7. पुलिस कार्रवाई और FIR की समस्या
8. कानून क्या कहता है?
9. महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सरकारी अभियान
10. जनतंत्र प्रहरी का सर्वे
11. महिलाओं की राय
12. पुलिस अधिकारियों की राय
13. समाधान और सुरक्षा सुधार
14. निष्कर्ष

1. महिला सुरक्षा 2025 की वास्तविक स्थिति
2025 में महिला सुरक्षा भारत में एक राष्ट्रीय चिंता का विषय है।
– महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि
– साइबर उत्पीड़न बढ़ा
– घरेलू हिंसा के मामले रिकॉर्ड स्तर पर
– न्याय मिलने में देरी
– ग्राम पंचायत से लेकर शहरों तक असुरक्षा
महिलाएँ कहती हैं: “सड़कों पर नहीं, घर में भी सुरक्षित महसूस नहीं होता।”
2. महिलाओं के खिलाफ अपराध क्यों बढ़ रहे हैं?
प्रमुख कारण:
– पुलिस–प्रशासन की लापरवाही
– अपराधियों में कानून का डर कम
– सोशल मीडिया का दुरुपयोग
– महिलाओं की शिकायतों पर ध्यान न देना
– परिवारों में जागरूकता की कमी
– त्वरित कार्रवाई का अभाव
महिला सुरक्षा 2025 का सबसे बड़ा खतरा यह है कि अपराध बढ़ तो रहे हैं,
लेकिन कार्रवाई तेज़ नहीं हो रही।
3. घरेलू हिंसा के बढ़ते मामले
2024–25 में घरेलू हिंसा के मामलों में 40% तक वृद्धि हुई है।
कारण:
– आर्थिक तनाव
– शराब की लत
– परिवारिक दबाव
– महिलाओं की आर्थिक निर्भरता
बहुत सी महिलाएँ शिकायत दर्ज ही नहीं करातीं—
या तो डर की वजह से,
या परिवार की “इज्जत” बचाने के लिए।
4. कार्यस्थल पर उत्पीड़न
कॉर्पोरेट, स्कूल, कॉलेज, फैक्ट्री—हर जगह महिलाएँ उत्पीड़न का सामना कर रही हैं।
– बॉस द्वारा दबाव
– छेड़छाड़
– गलत निगाहें
– काम देने के बदले निजी फायदे की मांग
– महिला कम्प्लेंट कमेटी निष्क्रिय
महिला सुरक्षा 2025 में कार्यस्थल सुरक्षा बड़े संकट के रूप में उभरी है।
5. सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़
बस, ट्रेन, बाजार, सड़क—हर जगह महिलाएँ असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
– Eve-teasing
– पीछा करना (Stalking)
– Touching
– Comments
– गलत नजरें
महिलाएँ कहती हैं:
“हमारे कपड़े समस्या नहीं, सोच समस्या है।”
6. साइबर क्राइम और ऑनलाइन उत्पीड़न
2025 में महिलाओं के खिलाफ सबसे तेजी से बढ़ने वाला अपराध है साइबर क्राइम।
– फेक अकाउंट
– अश्लील मैसेज
– तस्वीरों का दुरुपयोग
– साइबर स्टॉकिंग
– ब्लैकमेलिंग
– व्हाट्सएप/इंस्टाग्राम धमकियाँ
साइबर हेल्पलाइन भी कई बार समय पर जवाब नहीं देती।
7. पुलिस कार्रवाई और FIR की समस्या
महिलाओं ने बताया कि:
– FIR आसानी से दर्ज नहीं होती
– पुलिस समझाने की कोशिश करती है
– परिवार को बुलाने का दबाव
– “समाधान कर लो” कहा जाता है
– महिला हेल्पडेस्क की संख्या कम
– सुरक्षा गश्त कम
महिला सुरक्षा 2025 तभी मजबूत होगी
जब FIR दर्ज करना आसान बनाया जाए।
8. कानून क्या कहता है?
महिलाओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कानून:
– IPC सेक्शन 354 (छेड़छाड़)
– सेक्शन 509 (अश्लील कमेंट)
– पॉक्सो एक्ट (नाबालिग सुरक्षा)
– घरेलू हिंसा अधिनियम 2005
– POSH Act 2013 (कार्यस्थल सुरक्षा)
लेकिन कानून मजबूत होने के बावजूद लागू कमजोर है।
9. महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सरकारी अभियान
सरकार ने कई कदम उठाए हैं:
– नारी सुरक्षा ऐप
– 112 हेल्पलाइन
– 1091 महिला हेल्पलाइन
– One Stop Center
– Self Defence प्रशिक्षण
– CCTV अभियान
– महिलाओं के लिए स्पेशल बैरक
लेकिन जागरूकता कम होने की वजह से इनका लाभ पूरा नहीं मिल रहा।
10. जनतंत्र प्रहरी का सर्वे
हमने 9 राज्यों में 1800 महिलाओं से बात की।
परिणाम:
– 72% महिलाएँ असुरक्षित महसूस करती हैं
– 58% महिलाएँ साइबर क्राइम से परेशान
– 48% महिलाएँ पुलिस से निराश
– 65% महिलाओं ने कहा: छेड़छाड़ आम बात
– 40% महिलाओं ने कहा कि वे शिकायत नहीं करतीं
11. महिलाओं की राय
महिलाओं ने स्पष्ट कहा:
– पुलिस व्यवहार सुधरे
– FIR आसानी से हो
– तेज़ कार्रवाई हो
– CCTV बढ़ाए जाएँ
– रात में पुलिस गश्त बढ़े
एक महिला ने कहा—
“हमें सुरक्षा वादों में नहीं, सुरक्षा जमीन पर चाहिए।”
12. पुलिस अधिकारियों की राय
पुलिस अधिकारियों ने कहा:
– स्टाफ कम
– शिकायतें ज्यादा
– डिजिटल क्राइम रोकना मुश्किल
– संसाधन सीमित
– महिलाओं की शिकायतें गंभीर
लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि
“सिस्टम में सुधार की जरूरत है।”
13. समाधान और सुरक्षा सुधार
विशेषज्ञों के अनुसार समाधान:
– पुलिस में महिला स्टाफ बढ़े
– सख्त कानूनी कार्रवाई
– साइबर सेल को बढ़ाना
– CCTV और स्ट्रीट लाइट
– महिलाओं को सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग
– स्कूलों में महिला सुरक्षा पाठ्यक्रम
– सार्वजनिक परिवहन सुरक्षित करना
14. निष्कर्ष
भारत में महिला सुरक्षा 2025 केवल कानून का मुद्दा नहीं—
यह सामाजिक सोच, पुलिस व्यवहार और सिस्टम की जिम्मेदारी का मुद्दा है।
महिलाएँ घर, सड़क और ऑफिस—
तीनों जगह सुरक्षित हों,
तभी समाज सुरक्षित कहलाएगा।
महिलाओं की सुरक्षा केवल उनकी नहीं—
पूरे राष्ट्र की सुरक्षा है।
