भारत की करोड़ों महिलाओं के लिए वर्षों से आर्थिक सहारा बनकर खड़ा रहने वाला राष्ट्रीय महिला कोष (Rashtriya Mahila Kosh – RMK) अब इतिहास बन चुका है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (WCD) ने RTI के एक जवाब में साफ-साफ कहा है कि सरकार ने RMK को बंद करने का निर्णय ले लिया है। यह जवाब हरियाणा के मोहित वालिया द्वारा दायर RTI पर दिया गया।
इस खबर ने महिला विकास क्षेत्र में कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या यह फैसला महिलाओं के लिए उपलब्ध माइक्रो-फाइनेंसिंग विकल्पों में एक बड़ा खालीपन नहीं छोड़ देगा? क्या सरकार इसके विकल्प के रूप में कोई नई योजना ला रही है? और सबसे अहम—क्या महिला उद्यमिता को नुकसान पहुंचेगा?
राष्ट्रीय महिला कोष—एक उम्मीद, जिसे अचानक बंद कर दिया गया
1993 में स्थापित RMK का उद्देश्य था महिलाओं को
✔ छोटे व्यवसाय शुरू करने,
✔ स्वसहायता समूह बनाने,
✔ और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करना।
दशकों तक यह माइक्रो-क्रेडिट के क्षेत्र में महिलाओं के लिए आधार स्तंभ रहा। लेकिन RTI उत्तर में मंत्रालय ने एक लाइन में इसकी समाप्ति की घोषणा कर दी:
“The Ministry of WCD has decided to close down Rashtriya Mahila Kosh.”
इस एक वाक्य के पीछे कितनी कहानियाँ छुपी हैं—
घरों में चूल्हा जलाने के लिए छोटे-छोटे बिज़नेस शुरू करने वाली लाखों महिलाओं की।
कई राज्यों में महिला समूहों ने RMK के जरिए फंड लेकर अपने पैरों पर खड़े होने का प्रयास किया था।
लेकिन अब यह आशाएँ अचानक खत्म हो गईं।
NGO अब RMK से लोन नहीं ले सकेंगे—सीधा असर ग्रामीण महिलाओं पर
RTI जवाब का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला हिस्सा यह था:
“No loan is being disbursed since RMK is being dissolved.”
इसका मतलब यह है कि
अब देश का कोई भी NGO महिलाओं को RMK की मदद से लोन या आर्थिक सहायता नहीं दे सकेगा।
यह फैसला उन लाखों महिलाओं के लिए चिंताजनक है जो
– घर से छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं,
– सिलाई, कढ़ाई, डेयरी या घरेलू उद्योग चलाना चाहती हैं,
– या जिनके पास बैंक लोन की जटिल प्रक्रिया को समझने लायक दस्तावेज़ और बैंकिंग हिस्ट्री नहीं होती।
RMK उन महिलाओं के लिए एक आसान रास्ता था—जो अब बंद हो गया है।
2022 तक RMK में बची राशि: ₹263.74 करोड़
RTI में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई—
RMK के पास ₹263.74 करोड़ (अनऑडिटेड) राशि अभी भी उपलब्ध थी।
यह सवाल उठता है कि जब संस्था के पास इतना बड़ा फंड था, तो इसे बंद करने की क्या मजबूरी थी?
क्या फंड का सही उपयोग नहीं हो रहा था?
या सरकार इसे किसी नई स्कीम में ट्रांसफर करने की तैयारी कर रही है?
अभी तक मंत्रालय ने इस पर कोई विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है।
किस आधार पर बंद हुआ RMK? कोई रिपोर्ट उपलब्ध नहीं
जब RTI में पूछा गया कि RMK को बंद करने का आधार क्या है, तो मंत्रालय का जवाब था:
“As per office record no such report is available.”
यहाँ सबसे बड़ा सवाल यही उठता है—
क्या इतने बड़े निर्णय के लिए कोई विस्तृत अध्ययन, रिपोर्ट या मूल्यांकन नहीं किया गया?
अगर नहीं किया गया, तो यह पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
और अगर किया गया, तो वह रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं है?
